बिलासपुर। कीमत लगातार बढ़ रही है। समानांतर में वजन कम किए जाने जैसी गतिविधियां भी बदस्तूर जारी हैं। यह स्थितियां खाद्य तेलों में मांग को स्थिर कर रहीं हैं।

खाद्य तेलों का उपयोग कम करें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस अपील से दूर है खाद्य तेल बाजार और उपभोक्ता लेकिन कमजोर मांग तथा वजन कम किए जाने की स्थितियां अब बाजार को भंडारण से दूर कर रहीं हैं।

बढ़ रही कीमत, घट रहा वजन

पामोलिन तेल की कमजोर उपलब्धता और पैकेजिंग मटेरियल्स में बेतहाशा गर्मी की वजह से उत्पादन लागत बढ़ी हुई है। फलस्वरुप तेल उत्पादक इकाइयां लागत की भरपाई करने के लिए पैकिंग में उत्पादन की मात्रा कम करने लगीं हैं। यह सीधे-सीधे उपभोक्ता हितों को नुकसान पहुंचा रहा है, तो चिल्हर बाजार कमजोर मांग जैसी स्थिति का सामना करने के लिए विवश है।

इनकी डिमांड पर ब्रेक

मध्यान्ह भोजन, वैवाहिक तारीखें नहीं। होटल और ढाबे खाद्य तेलों के बड़े उपभोक्ता क्षेत्र माने जाते हैं लेकिन ग्रीष्मकालीन अवकाश और तेज धूप की वजह से बड़ी मांग वाले यह क्षेत्र शांत हैं। वैसे भी अप्रैल मध्य से लेकर जून अंत तक का महीना खाद्य तेलों के लिए कमजोर मांग वाला माना जाता है। इसलिए भी खरीदी को लेकर रुझान नहीं है।

मात्रा कम, कीमत ज्यादा

1 लीटर नहीं, 900 मिलीलीटर के पैक में आ रहा है सरसों तेल लेकिन 160 से 200 रुपए जैसी ऊंची कीमत के साथ खाद्य तेल बाजार में शिखर पर है। 170 से 180 रुपए में सनफ्लावर, 140 से 170 रुपए में राइस ब्रान एवं सोयाबीन तथा वनस्पति तेल का पैक 130 से 160 रुपए जैसी ऊंची कीमत पर पहुंचा हुआ है। वजन की बात करें, तो प्रत्येक खाद्य तेल की पैकिंग का वजन 800 मिलीलीटर तय किया जा चुका है।

5 और 15 नहीं

कीमत और वजन को लेकर जैसी स्थितियां बनी हुईं हैं, उसके बाद 5 लीटर और 15 लीटर जैसे परंपरागत बड़े पैक की मांग लगभग शून्य जैसी हो चली है। सिर्फ छोटे पैक में ही डिमांड को देखते हुए होलसेल और रिटेल मार्केट ने भी बड़े पैक की खरीदी में कमी लानी चालू कर दी है। छोटे पैकेट का भंडारण भी उतना ही, जितनी की मांग निकली हुई है।