दबदबा सरना और महामाया का



भाटापारा। प्रयोगधर्मी किसानों को इस बरस रिसर्च क्वालिटी के धान बीज की खरीदी 20 प्रतिशत तेजी के बीच करनी होगी। अलबत्ता एचएमटी बीज की ठहरी हुई कीमत जरूर राहत देने वाली मानी जा रही है। बड़ा परिवर्तन यह देखा जा रहा है कि सरना की बोनी को लेकर रुझान बढ़ा है।

सहकारी समितियों में खाद और बीज के उठाव का आंकड़ा शत-प्रतिशत के करीब पहुंचने को है। इसके साथ ही निजी क्षेत्र की बीज विक्रय संस्थानों में भी किसान पहुंचने लगे हैं। हाइब्रिड बीज की जगह तो बनी हुई है लेकिन रिसर्च क्वालिटी सीड्स में जैसी मांग निकली हुई है, उससे संस्थानें हैरत में हैं। लिहाजा कंपनियों के पास दोबारा आर्डर भेजे जा रहे हैं।

रिसर्च क्वालिटी महामाया

प्रदेश में पोहा उत्पादन करने वाली ईकाइयां हर साल बढ़त ले रहीं हैं। अनुपात में महामाया धान की मांग में भी इजाफा हो रहा है। ऐसे में ज्यादा उत्पादन देने वाली प्रजाति की मांग पहले है। इसलिए महामाया में कॉमन रिसर्च क्वालिटी का बीज 10 किलो के पैक में 700 रुपए में खरीदा जा सकेगा जबकि पोहा के लिए ही तैयार ‘नाथ पोहा’ धान बीज भी किसानों के बीच तेजी से पहुंच बना रहा है। इसकी कीमत भी 10 किलो के पैक में 700 रुपए तय की गई है।

सरना सबसे आगे

विलंब से तैयार होने वाली प्रजाति मानी जाती है सरना को। इसके बावजूद सरना बीज की मांग, बीते साल के अनुपात में लगभग 10 से 15 प्रतिशत ज्यादा देखी जा रही है। इसका 10 किलो का पैक 750 रुपए में लिया जा सकेगा। ऐसी भूमि, जिसकी जल धारण क्षमता कमजोर होती है उसके लिए धान प्रजाति 1010 को आदर्श माना गया है। इसका 25 किलो का पैक 900 रुपए में खरीदा जा रहा है। इसमें हल्की शॉर्टेज की खबर है।

बारीक में यह दो

बारीक धान की भिन्न प्रजातियों के बीच विष्णु भोग और एचएमटी ने जैसी पहुंच और पहचान बनाई है, उसने इन दोनों प्रजातियों की बोनी का रकबा भी बढ़ाया है। गहरी और उच्च जल धारण क्षमता वाली भूमि में आसानी से यह दोनों प्रजातियां बढ़वार लेती हैं। पूरे साल बेहतर कीमत देने वाले विष्णु भोग का बीज 65 रुपए किलो की दर पर मिल रहा है, तो एचएमटी का 10 किलो का पैकेट 800 रुपए में विक्रय के लिए उपलब्ध है।

आंशिक बढ़ोतरी

धान बीज की कीमतों में मामूली बढ़त हुई है लेकिन मोटा धान के बीज की मांग ज्यादा है। इसमें वेधा सीड्स के सरना और महामाया में मांग अपेक्षाकृत ज्यादा है।
– कृष्णा उपाध्याय, परशुराम कृषि केंद्र, भाटापारा