घटती मांग ने बढ़ाई चिंता

भाटापारा। नहीं के बराबर रह गई है पोहा में मांग। तेजी की आंच में उबल रहा है चावल। धारणा और तेज होने की है क्योंकि दोनों किस्म के क्वालिटी धान में कीमत लगातार बढ़ते क्रम पर है।

धान की बढ़ती कीमत का असर अब पोहा और चावल के खुदरा बाजार पर पड़ने लगा है। फलस्वरूप दोनों में उपभोक्ता खरीदी गिरते क्रम पर आने लगी है। चिंता सबसे ज्यादा पोहा को लेकर है, जिसमें अंतरप्रांतीय बाजार तेजी से घट रहा है। लोकल मांग पहले से ही कमजोर है।

अंतरप्रांतीय मांग शून्य

पोहा क्वालिटी का महामाया धान 2800 से 3200 रुपए क्विंटल। स्वाभाविक था पोहा की कीमतों का बढ़ना। गुणवत्ता के हर मानक को पूरा करने के बाद अब पोहा में नया भाव 4400 से 5000 रुपए क्विंटल बोला जा रहा है। झटका थी यह कीमत महाराष्ट्र जैसे उपभोक्ता राज्यों के लिए क्योंकि प्रतिस्पर्धी पोहा उत्पादक राज्य बिहार और गुजरात का पोहा 3500 से 3800 रुपए क्विंटल पर मिल रहा है। लिहाजा छत्तीसगढ़ से पोहा की खरीदी पर ब्रेक लगा दी है उपभोक्ता राज्यों ने।

उबाल चावल में भी

धान विष्णुभोग 8100 से 8500 रुपए क्विंटल। फलस्वरूप चावल रिकॉर्ड 15000 से 15500 रुपए क्विंटल। मांग अब इसमें भी कम हो रही है। विकल्प के रूप में सहारा बन रहा है सियाराम लेकिन यह भी 6000 से 6500 रुपए क्विंटल पर जा पहुंचा है। तेजी उस एच एम टी चावल में भी आ चुकी है जिसमें नई कीमत प्रति क्विंटल 5500 से 6500 रुपए बोली जाने लगी है। लिहाजा डिमांड अब इन दोनों में कमजोर होती नजर आ रही है।

आशंका और तेजी की

धान, चावल और पोहा। तेजी की धारणा को इसलिए बल मिल रहा है क्योंकि बारीक धान की बोनी का रकबा लगातार कम हो रहा है जबकि मांग अपने स्तर पर कायम है। महामाया धान में तेजी की धारणा इसलिए बनी हुई है क्योंकि बारीश के दिनों के लिए भंडारण कर रहीं हैं ईकाईयां। पोहा की कीमतों में टूट की संभावना इसलिए नही है क्योंकि ऊंची कीमत पर पोहा क्वालिटी के धान की खरीदी करने के लिए विवश हैं पोहा मिलें।