पीएससी टापर की कहानी
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की राज्य प्रशासनिक सेवा परीक्षा पहले ही प्रयास में पास कर अनुसूचित जनजाति वर्ग के टापर बने अजय मोडियम की कहानी बंबईया फिल्मों की ही तरह है. वे ऐसे गांव से आते हैं जहाँ न मोबाईल नेटवर्क है, न बिजली, किसान दंपति के बेटे और नवोदय स्कूल के छात्र रहे नक्सल प्रभावित क्षेत्र के अजय ने पहले प्रयास में ही सफलता हासिल कर ली। सामान्य वर्ग में उनका रैंक 98 है। अजय को डिप्टी कलेक्टर का पद मिल सकता है।
बीजापुर जिला मुख्यालय से 60 किलोमीटर दूर उबड़-खाबड़ रास्ते पार कर वनांचल के गांव चिल्कापल्ली पहुंचा जा सकता है। प्रदेश में अब इस गांव की नई पहचान पीएससी टापर डिप्टी कलेक्टर अजय मोडियम के गांव की बन गई है। इस गांव में न तो बिजली है न ही मोबाइल का नेटवर्क आसानी से मिलता है। सुविधाओं से दूर अभावों के बीच शिक्षा की जिजिविषा ने नवोदय स्कूल पहुंचाया जहाँ उसके सपनों को पंख लगे. अजय की प्राथमिक शिक्षा चिन्ताकुन्टा के प्राथमिक शाला में हुई। पिता कृष्णैया व माँ नागी गांव में ही खेती बाड़ी का काम करते हैं। बड़े भाई शिक्षक और बड़ी बहन नर्स हैं। पांचवीं कक्षा के बाद प्रवेश परीक्षा पास कर जवाहर नवोदय विद्यालय बारसूर में दाखिला कराया। जहाँ से पास आउट होने के बाद 2014 में NIT रायपुर में प्रवेश हासिल कर 2018 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर PSC की तैयारी में जुट गए।
इंजीनियर बनता तो अपने लिए जीता
अजय ने बताया हमारे गांव में आज भी बिजली, सड़क और नेटवर्क की समस्या है। पास उसूर, तरेम, बासागुड़ा और सारकेगुड़ा गांव आए दिन नक्सलियों के हमले की वजह से सुर्खियों में रहते हैं. किसी कंपनी में इंजीनियर बन जाता। जो कुछ होता अपने लिए ही होता। दूसरों के लिए कुछ नहीं कर पाता। मुझे तब लगा कि प्रशासनिक सेवा में रहकर लोगों के लिए कुछ कर सकता हूं।
गांव की शिक्षा के लिए कुछ कर पाऊं
अजय ने बताया कि रायपुर एनआईटी में पढ़ने के दौरान लगा कि कैसे हम यहां बैठकर चांद पर जाने की बातें करते हैं। बस्तर के अंदरूनी इलाकों में तो बच्चे स्कूल तक नहीं जा पाते। लगा कि कुछ करना है, इसलिए सिविल सर्विसेज को चुना और तैयारी शुरू की। अनुसूचित जनजाति वर्ग के होने की वजहसे सरकार से मदद मिली, UPSC की कोचिंग के लिए दिल्ली गया। जहाँ से लौट कर बिलासपुर में रहकर CGPSC के लिए सेल्फ स्टडी करने लगा। अजय ने कहा कोशिश करूंगा अपने गांव के बच्चों की शिक्षा के लिए कुछ बेहतर कर पाऊं। मौका मिलता है तो जो कुछ सीखा है वहां के साथियों से साझा करता हूं।