मरम्मत के काम में भी बरत रहे लापरवाही
रतनपुर। तेलिया डोंगरी के पास बारिश की पानी से बहे नहर के हिस्से की मरम्मत करने पहुंचे जल संसाधन उप संभाग बेलगहना के अमले ने पानी के प्रवाह को डायवर्ट करने नहर के दुसरे हिस्से को क्षतिग्रस्त कर दिया है. वही बहे नहर के मरम्मत के काम में भी लापरवाही बरती जा रही है. नहर के नीचे के हिस्से की मिट्टी को हटाने बिना ही मुर्रुम से भरे बोरों को रखा जा रहा है. इससे पानी का रिसाव होकर नहर के क्षतिग्रस्त होने की संभावना बनी रहेगी.
ग्राम पोड़ी में तेलिया डोंगरी के पास नहर का बड़ा हिस्सा बारिश के पानी में बह गया। अधिकारी सूचना के बाद भी नहर का मरम्मत करना तो दूर झांकने नहीं पहुंचे हैं। इसकी खबर द सेंट्रल न्यूज़ ने 17 अगस्त को प्रमुखता से प्रकाशित की थी. *http://thecentralnews.in/?p=2754*
इस पर जल संसाधन संभाग पेण्डारोड हरकत में आया और अपने अधीनस्थ जल संसाधन उपलब्ध संभाग बेलगहना के अमले को निर्देशित कर नहर के बहे हुए हिस्से की मरम्मत का काम शुरू कराया. नहर मरम्मत के काम में भी गंभीर लापरवाही बरती जा रही. मरम्मत कार्य में लगे मजदूरों द्वारा नहर के बहे हिस्से की मिट्टी को हटाएं बिना ही उसी पर जंगल की कच्ची लकड़ियों की बल्लियों को डालकर उस पर ही मुर्रुम से भरी बोरियों को रखा जा रहा है. इससे फिर से पानी का रिसाव होकर नहर के छतिग्रस्त हो जाने की आशंका बनी रहेगी.
गौरतलब हो कि रतनपुर क्षेत्र की खेतों की सिंचाई के लिए चांपी जलाशय से नहर निकली बनी है। इसके रखरखाव और प्रबंधन की जिम्मेदारी जल संसाधन संभाग पेण्डारोड अधीन जल संसाधन उपसंभाग बेलगहना की है। इनके रख-रखाव व बेहतर जल प्रबंधन के लिए छत्तीसगढ़ शासन के जलसंसाधन विभाग ने करोड़ों रूपए स्वीकृत किए है जिसके तहत इसी मानसून सत्र के पहले नहर का लाइनिंग और मरम्मत का काम भी कराया गया है। वहीं जल संसाधन उप संभाग बेलगहना के गुणवत्तापूर्ण काम की पोल बारिश ने खोल कर रख दी है। ग्राम पोड़ी के आगे तेलिया डोंगरी के पास नहर का बड़ा हिस्सा फूट गया है। इससे नहर का पानी अब जंगल में जा रहा है। ग्रामीणों ने इसकी सूचना दो माह पहले ही दे दी है। इसके बाद भी न सिंचाई विभाग का कोई अमला मौके पर पहुंचा है और न ही अधिकारी मुख्य नहर को ठीक कराने कोई पहल कर रहे है। हालात ऐसे ही बने रहे तो रतनपुर व लालपुर इलाके के सैकड़ों किसानों को खरीफ और रबि की फसलों के लिए सिंचाई के पानी से वंचित होना पड़ेगा।
नहर का पूरा फायदा किसानों को नहीं मिल रहा
वर्षों से लंबित चांपी जलाशय का काम 2003 में पूरा हुआ। बांध बनी नहरें निकली नहरों से बिरगहनी बासाझाल चपोरा खैरा नवागांव मोहदा पोड़ी तिलकडीह जमुनाही लालपुर रतनपुर सहित 15 से अधिक गांवों के से छह हजार एकड़ से अधिक खेतों तक पानी पहुंचने का भरोसा मिला। मगर नहर के निर्माण में अधिकारियों की लापरवाही से रतनपुर क्षेत्र के किसानों को चापी जलाशय से निकली नहर का पूरा फायदा नहीं मिला। इससे किसानों के दो सौ एकड़ खेतों को नहर से पूरा पानी नहीं मिल पा रहा है।
करोड़ों खर्च पर नतीजे सिफर
प्रदेश शासन ने रतनपुर स्थित सौ एकड़ क्षेत्र में फैले दुलहरा जलाशय को भी नहर के माध्यम से चांपी जलाशय की पानी से भर कर सिंचाई का रकबा बढाने की योजना बनाई। इसके लिए करोड़ों रूपए खर्च कर नहर को दुलहरा जलाशय से लिंक कर नहर का लाइनिंग का काम कराया गया है। लाइनिंग के काम की खराब गुणवत्ता की वजह से इसमें भी कई जगह दरार नजर आती है। वहीं षाखा नहरों का काम भी जमीन अधिग्रहित करने के बाद भी पूरा नहीं किया गया है। इससे किसानों के खेतों तक सिंचाई के लिए पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
बूंद बूंद पानी को तरस रहे किसान
कोरबा भावर के किसानों ने बताया 2003 में नहर का निर्माण हुआ था । आज 18 साल हो गए नहर बने। इस क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए बूंद-बूंद पानी को तरसना पड़ रहा है। पहले रमचंदा के जंगल व कका पहाड़ से आने वाली बारिष के पानी से किसानों केे खेतों की सिंचाई हो जाती थी। जंगल पहाड़ और खेतों के बीच नहर की दीवार आ गई । इससे पानी के बहाव की दिषा बदल गई। शाखा नहर से लगे अनेक किसानों के खेत को पानी के लिए तरसना पड रहा़ है।
शाखा नहर हो गए है ऊंची
किसानों की कोई सुनने वाला नही है। नहर की तकनीकी खामियों के बारे में किसान कहते है कि मुख्य नहर से निकली षाखा नहरें उंची हो गर्इ्र है। रतनपुर एक नंबर षाखा नहर नवडीह के पास की षाखा नहर से मुख्य नहर नीची है। दो नंबर माइनर के पास की पुल तीन फीट उंची हो गई है। जोगी अमराई माइनर नीचे है। सिंचाई विभाग अफसरों की लापरवाही और तकनीकी खामियों का नुकसान किसानों उठाना पड़ रहा है। नहर जगह जगह से टूट फूट गया है। गंभीरता से अधिकारी नहरों का रख रखाव नही कर रहे है। नहरों का पानी खेतों तक नही पहुंच रहा है। सारा पानी लालपुर के पास नाला में बहकर चला जाता है।






