बिलासपुर। घट रहे वृक्ष बबूल के। बढ़ रही कीमत बीज की। मांग की तुलना में आधी भी नहीं है आपूर्ति, इसलिए भाव बोले जा रहे हैं 2500 से 2600 रुपए क्विंटल।
पशु आहार उत्पादक ईकाइयां पहली बार बबूल बीज की शॉर्टेज का सामना कर रहीं हैं। फलस्वरुप प्रति क्विंटल भाव बढ़ते क्रम पर है। समानांतर में चरोटा भी बढ़त लिए हुए हैं प्रति क्विंटल कीमत में। शॉर्टेज की वजह से प्रदेश का प्रमुख वनोत्पाद महुआ भी पहली बार 4500 से 4800 रुपए क्विंटल जैसी तेज कीमत पर पहुंचा हुआ है।

और महंगा होगा बबूल बीज
बिहार की मांग के दबाव में है अपना छत्तीसगढ़। 2500 से 2600 रुपए क्विंटल पर चल रहा बबूल बीज और वृद्धि की ओर इशारा कर रहा है क्योंकि वनोपज बाजार मांग की तुलना में आधी आपूर्ति भी नहीं कर पा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रिहायशी इलाके विस्तार ले रहे हैं। ऐसे में बबूल के वृक्षों की कटाई बेखौफ जारी है। नए वन क्षेत्रों के विस्तार की सूची में बबूल का नाम अब गायब हो चुका है।
निर्यात बंद फिर भी तेज
जापान, ताईवान और मलेशिया के लिए चरौटा का निर्यात लगातार दूसरे साल भी बंद है लेकिन भाव में तेजी का क्रम अभी भी जारी है क्योंकि निर्यात खुलने के संकेत से स्टाॅकिस्टों की खरीदी जारी है। तेजी की दूसरी वजह कमजोर आपूर्ति को भी माना जा रहा है। नई फसल की आवक को फिलहाल दो से तीन माह का लंबा वक्त है। तब तक कीमत में ऐसी ही स्थिति की संभावना है।

एकतरफा तेजी महुआ फूल में
स्वीट कॉर्नरों में नजर आने लगे हैं महुआ के फूलों से बनी खाद्य सामग्रियां। खरीदी को लेकर जैसा रुझान बना हुआ है, उससे महुआ संग्राहकों और वनोपज बाजार को व्यापार का नया क्षेत्र मिल रहा है। मदिरा उत्पादन करने वाली ईकाइयों की मांग अपने स्तर पर मजबूत है इसलिए महुआ फूल की कीमत रिकॉर्ड 4500 से 4800 रुपए क्विंटल तक पहुंच कर आने वाले दिनों में बढ़त की स्थिति बने रहने की और इशारा कर रही है।
आवक में गिरावट
महुआ, बबूल बीज और चरोटा प्रदेश के प्रमुख वनोपज हैं लेकिन उपलब्धता, मांग की तुलना में बेहद कम है। इसलिए इनमें तेजी आ रही है।
–सुभाष अग्रवाल, संचालक,एस पी इंडस्ट्रीज, रायपुर