बलौदा बाजार। बढ़ रहा बाजार, घट रहा भंडार। जिले की वाटर पैकेजिंग यूनिटें गिरते भूजल स्तर की वजह से संकट में आ चुकी हैं। इसलिए उत्पादन घटाने जैसे फैसले विवशता में लिए जा रहे हैं।
प्रतिस्पर्धी बाजार के झटके के बाद अब वाटर पैकेजिंग यूनिटों को ऐन सीजन के दौरान गिरते भूजल ने तगड़ा झटका दिया है। नया बोर खनन जैसा एकमात्र विकल्प इसलिए अमल में नहीं लाया जा सकता क्योंकि खनन पर कड़ी बंदिश लगी हुई है। इसलिए उत्पादन घटाने के साथ ऐसी पेकिंग पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, जिसकी मांग ऑफ सीजन के दौरान भी बनी रहती है।

साथ छोड़ रहे बोर
न्यूनतम 300 फीट। अधिकतम 400फीट गहराई वाले बोर या तो साथ छोड़ चुके हैं या फिर जल उपलब्धता कमजोर हो चुकी है। नया बोर खनन पर कड़ी बंदिश है। इसलिए जैसे-तैसे करके आपूर्ति बनाए रखने के प्रयास हैं क्योंकि अप्रैल,मई के बाद जून का महिना मध्य में पहुंच चुका है। पानी का सीजन अब शिखर पर है।बाद के महीने ऑफ सीजन के माने जाते हैं।

फोकस इस पर
जल संकट की दस्तक के बीच अब वाटर पैकेजिंग यूनिटें पूरे साल मांग में बनी रहने वाली पेंकिंग पर ध्यान बढ़ा रहीं हैं। इसमें जार और पाउच मुख्य है।जार व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और पाउच हाॅटल,पान दुकानों के अलावा स्ट्रीट फूड काउंटरों में पूरे साल मांग में रहते हैं।बाॅटल की सभी पैकेजिंग उतनी ही किए जाने की योजना है,जितने में मांग पूरी हो सकती है।

सीजन में प्रतिदिन
गिरते भूजल के बीच फिलहाल जिले में हर रोज 3 हजार से 4 हजार के बीच जार में पानी की डिमांड है जबकि 6 हजार से 7 हजार पानी के बाॅटल हर रोज डिमांड में हैं। 50 से 60 हजार पानी पाउच की डिमांड बनी हुई है। मालूम हो कि जिले में वाटर पैकेजिंग यूनिटों की संख्या लगभग तीन दर्जन के आसपास है। यह संख्या अगले सीजन में 40 तक पहुंचने के संकेत है क्योंकि बाजार लगभग बढ़त की ओर है।