रासेयो इकाई ने मनाई महर्षि वेदव्यास जयंती

बिलासपुर।  व्यास पूजा स्मरण कराती है कि शिक्षक जीवन निर्माता होते हैं। विद्यार्थी जीवन का सर्वोच्च दायित्व है गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, अनुशासन और सेवा-भाव का पालन। यदि युवा पीढ़ी महर्षि वेदव्यास के विचारों को आत्मसात करे, तो समाज व राष्ट्र का भविष्य स्वर्णिम हो सकता है। यह बात मुख्य अतिथि डॉ. एन.के. चौरे अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय बिलासपुर ने कही।
बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के तत्वावधान में महर्षि वेदव्यास जयंती पर “व्यास पूजा” कार्यक्रम का आयोजन किया गया।‌ विदुषी तिवारी ने महर्षि वेदव्यास के जीवन, लेखन, एवं उनके द्वारा रचित महाभारत, अठारह पुराण तथा ब्रह्मसूत्रों में उनके अतुलनीय योगदान की जानकारी दी। दीपांशु साहू ने गुरु पूर्णिमा के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए गुरु परंपरा की प्रासंगिकता पर विचार रखे। वैज्ञानिक डॉ. दिनेश पांडे ने कहा, भारतीय संस्कृति में महर्षि वेदव्यास का स्थान अत्यंत उच्च है। उन्होंने धर्म, नीति और समाज के संतुलन के लिए कालजयी ग्रंथों की रचना की। उन्होंने विद्यार्थियों से चरित्र निर्माण को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। वैज्ञानिक डॉ. विनोद कुमार निर्मलकर ने कहा गुरु ज्ञान का स्रोत और जीवन पथ मार्गदर्शक होते हैं। आज की पीढ़ी को इस परंपरा के पुनर्जीवन का वाहक बनना चाहिए।

विशिष्ट अतिथि डॉ. एस.एल. स्वामी ने कहा महर्षि वेदव्यास जैसे ऋषियों की जयंती मनाकर हम अतीत की दिव्यता से जुड़ते हैं और अपने वर्तमान को संस्कारित करते हैं। शिक्षकों की भूमिका केवल अकादमिक नहीं, बल्कि सामाजिक व नैतिक दिशा देने की भी है। वैज्ञानिक एवं राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी अजीत विलियम्स ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं विद्यार्थियों का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा गुरु पूर्णिमा न केवल भारतीय संस्कृति का पर्व है, बल्कि यह आत्मचिंतन और आत्मविकास का भी अवसर प्रदान करता है। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापक, वैज्ञानिक, कर्मचारी व छात्र-छात्राओं की सहभागिता रही।