खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कार्रवाई
बलौदाबाजार। 22 संस्थान और 110 सैंपल के साथ सबसे आगे है भाटापारा। थोड़ा ही पीछे है सिमगा 19 संस्थान और 98 सैंपल के साथ। 6 संस्थान और 11 सैंपल के साथ सबसे पीछे है बलौदा बाजार। त्यौहारी सीजन की शुरुआत हो चुकी है इसलिए सतत निगरानी और सख्ती की ठान ली है खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने।
“बने खाबो-बने रहिबो” अभियान समाप्त लेकिन जांच के जो परिणाम आए हैं वह चिंता बढ़ाने वाले हैं। खास तौर पर भाटापारा और सिमगा में चल रही अवांछित कारोबारी गतिविधियों पर लगातार निगरानी और सख्त कार्रवाई की जरूरत समझी जा रही है। जांच के दौरान उपभोक्ताओं से सीधी चर्चा में खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों ने इसे नोटिस में लिया है।

टॉप पर भाटापारा
22 संस्थान और 110 सैंपल। इस संख्या के साथ पूरे जिले में सबसे आगे है शहर भाटापारा। इसमें 100 सैंपल भले ही पास हो गए हो लेकिन फास्ट फूड काउंटर, गुपचुप, मोमोज सेंटर की कारोबारी गतिविधियां चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रहीं हैं क्योंकि खाद्य रंगों का अभी भी अधिक प्रयोग कर रहे हैं यह काउंटर। पान चटनी और बालूशाही का भले ही नष्टीकरण करवाया गया हो लेकिन अभियान के बाद फिर से इनका नजर आना और विक्रय किया जाना प्रशासन के लिए चिंताजनक माना जा रहा है।
चुनौती दे रहा सिमगा
19 संस्थान 98 सैंपल। भाटापारा के ठीक पीछे है सिमगा। जिला मुख्यालय से करीब 70 से 75 किलोमीटर की दूरी पर बसा सिमगा तेजी से व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ा रहा है। शहर पहुंचने की राह के दोनों किनारों और मुख्य बाजार में स्थित मिष्ठान भंडार और स्वीट कार्नरों की सख्त जांच में असुरक्षित मेटानिल येलो कलर का उपयोग किया जाना पाया गया। उपलब्ध कराने वाली संस्थान लक्ष्मी किराना स्टोर्स के संचालक को न केवल कड़ी फटकार लगाई गई बल्कि विक्रय के लिए रखा दो बाॅक्स कलर नष्ट करवाया गया।

सबसे पीछे
अभियान के दौरान कुल 47 संस्थान और 219 सैंपल में 6 संस्थान और 11 सैंपल की हिस्सेदारी रखने वाला बलौदा बाजार इस बात पर गर्व कर सकता है कि स्वच्छ कारोबारी गतिविधियों में हम सबसे आगे हैं लेकिन प्रशासन की कोशिश अब यह होगी कि वर्तमान आंकड़ा जिले में शून्य पर पहुंचे। इसलिए जांच अभियान निरंतर जारी रखने की योजना तैयार है।इन मिठाइयों के सैंपल
इन मिठाइयों के सैंपल
जिले में जांच की कमान संभालने वाले खाद्य सुरक्षा अधिकारी उमेश वर्मा का कहना है कि सोन पापड़ी और लड्डू सहित अन्य मिठाइयों के लिए उपयोग किया जा रहा बेसन की गुणवत्ता की सूक्ष्म जांच करवाई जाएगी। अभियान के दौरान सोन पापड़ी, मगज, बेसन और नारियल लड्डू के साथ ही चमचम, बर्फी, केसर और खोवा पेड़ा के भी सैंपल लिए गए हैं।
