भाटापारा। 1800 से 2000 रुपए क्विंटल। नया महामाया धान में बोली जा रही यह कीमत और भी कम हो सकती है क्योंकि पोहा के लिए जरूरी मानक गुणवत्ता का अभाव नई फसल में देखा जा रहा है।
बारिश के दिनों के लिए पोहा प्रसंस्करण इकाइयां अब अग्रिम भंडारण करने लगीं हैं लेकिन गुणवत्ता अभी भी नहीं मिल रही है। इसलिए भाव दबे हुए हैं। रही- सही कसर तैयार उत्पादन में कमजोर मांग पूरी कर रही है। हद तो तब, जब पोहा के सह उत्पाद में भी पहली बार डिमांड नहीं के बराबर है।

और टूट की आशंका
बदरा की मात्रा प्रति क्विंटल 6 से 8 किलो। दोगुनी मानी जा रही है यह मात्रा। नमी भी मानक से ज्यादा। यह दोनों मिलकर रबी फसल की गुणवत्ता को प्रभावित किए हुए हैं। फलस्वरुप पोहा बनाने वाली ईकाइयां 1800 से 2000 रुपए क्विंटल पर खरीदी कर रहीं हैं। टूट की अवधारणा को इसलिए भी बल मिल रहा है क्योंकि गुणवत्ता में सुधार के कार्य ईकाइयां अपने स्तर पर कर रहीं हैं।
तैयारी बारिश के दिनों के लिए
क्वालिटी भले सही नहीं हो लेकिन बारिश के दिनों में संचालन में बाधा नहीं आने पाए, यह सोच भंडारण के लिए खरीदी को बढ़ाए हुए है। इसके अलावा समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी की अवधि में कमजोर आवक को भी ध्यान में रखते हुए पोहा उत्पादक इकाइयां रबी फसल की खरीदी कर रहीं हैं।

उठाव नहीं पोहा में
पोहा उपभोक्ता प्रांतों से पोहा की मांग बेहद कमजोर है क्योंकि मध्य प्रदेश और गुजरात का पोहा, छत्तीसगढ़ के पोहा की तुलना में सस्ता है। इसलिए शहर की ईकाइयां 4000 रुपए क्विंटल की दर तय की हुई है। इसी तरह पोहा पाउडर 1400 से 2200 रुपए क्विंटल जैसी निम्न कीमत पर स्थिर है। इसके बावजूद पशु आहार विक्रेता संस्थानें खरीदी को लेकर उत्सुक नहीं हैं।
