सावन शांत, अब आस, गणेश उत्सव, नवरात्रि और दीपावली से
भाटापारा। बेहद ढीला रहा सावन का महीना। अच्छे कारोबार की आस अब गणेश उत्सव और नवरात्रि से है प्रसाद बाजार को।
लाई, लायची दाना, बताशा और फूटा चना बनाने वाली इकाइयों ने अब उत्पादन की गति धीमी कर दी है क्योंकि सावन का महीना आशाजनक परिणाम नहीं दे पाया। हालांकि गणेश उत्सव, नवरात्रि और दीपावली जैसे बड़ी मांग वाले पर्व करीब आ रहे हैं। आंशिक तैयारी तो कर ली है इकाइयों ने लेकिन भंडारण जैसी स्थितियों से परहेज किया जा रहा है। 
कमजोर मांग की बड़ी वजह
प्रसाद के रूप में दी जाने वाली लाई के लिए लाई क्वालिटी का धान सफरी काफी गर्म है। असर उत्पादित सामग्री पर स्वाभाविक रूप से पड़ा हुआ है। शक्कर की भी कीमत बढ़ने का असर लायची दाना और बताशा पर देखा जा रहा है। मांग में रहता है फूटा चना लेकिन मंडियों और बाजार से खरीदी बेहद महंगी पड़ रही है। यह स्थितियां बढ़ी कीमत और कमजोर मांग के रूप में मौजूद है।
कम नहीं यह भी
पोहा, खिचड़ी और खीर। भोग में बढ़ती इन तीनों की हिस्सेदारी ने भी परंपरागत प्रसाद बाजार पर प्रतिकूल असर डाला हुआ है। ले-देकर मंगलवार और शनिवार जैसे दो दिन के लिए ही मांग है प्रसाद बाजार में। लेकिन मात्रा दोनों दिनों में भी कम होती देखी जा रही है क्योंकि सेब और खीरा का चलन, प्रसाद के रूप में दिए जाने का, बढ़ने लगा है। 
फूटा चना 120 रुपए किलो
कमजोर मांग का सामना कर रहे प्रसाद बाजार को आस अब गणेश उत्सव और नवरात्रि से है। संतोषजनक मांग दीपावली तक बने रहने की संभावना के बीच यह कारोबारी क्षेत्र लाई 60 रुपए किलो, लायची दाना 65 रुपए किलो, बताशा 65 से 70 रुपए किलो और फूटा चना 120 रुपए किलो की दर पर विक्रय कर रहा है। फिलहाल तेजी की धारणा नहीं के बराबर ही है।
