कद्दू वर्गीय फसलों की बोनी के लिए उपयुक्त समय
बिलासपुर। करनी होगी भाजी फसलों की बोनी। दोबारा बोनी करें भिंडी की। कद्दू वर्गीय फसलें भी सफलतापूर्वक तैयार की जा सकती हैं। सब्जी वैज्ञानिकों की यह सलाह, उन किसानों के लिए वरदान बनेगी, जो असमय बारिश से हुए नुकसान की भरपाई की राह तलाश रहे हैं।
बीते 5 दिन से हो रही असमय बारिश से दलहन-तिलहन की फसलों को तो नुकसान पहुंचा ही है, साथ ही ऐसे किसानों पर यह बारिश कहर बनकर टूटी है, जो सब्जी फसलों की खेती कर रहे हैं। तैयार फसलों में सबसे ज्यादा नुकसान टमाटर, गोभी और बैगन की खेती कर रहे किसानों को हुआ है। इस नुकसान की पूरी भरपाई तो नहीं की जा सकती लेकिन कुछ ऐसी प्रजातियों की बोनी करके नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

राहत भाजी फसलों से
असमय बारिश से हुए नुकसान को भाजी फसलों की बोनी के जरिए काफी हद तक कम किया जा सकता है। जिन भाजी फसलों के लिए सुझाव दिए जा रहे हैं, उनमें लाल, पालक, मेथी, चौलाई और खेड़हा भाजी मुख्य है। इसके साथ में दीगर किस्म की उपलब्ध भाजी बीज की बोनी की जा सकती है।
दोबारा बोनी भिंडी की
जैसा रुख मौसम का बना हुआ है और तापमान में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, वह भिंडी फसल की बोनी के लिए सही है। अल्प अवधि में तैयार होने वाली सब्जी की यह प्रजाति बेहतर परिणाम तो देगी, साथ ही उपभोक्ता मांग को भी बढ़ाने में सक्षम है। लिहाजा भिंडी की बोनी की जा सकती है।

कद्दू वर्गीय फसलें भी
कुंदरू, परवल, कुम्हड़ा, लौकी, तुरई, तरबूज, खरबूजा, खीरा,टिंडा और करेले की बोनी के लिए समय सही है। उतार- चढ़ाव जैसे तापमान के बीच निरंतर निगरानी और बेहतर प्रबंधन के बीच यह फसलें भी सब्जी किसानों को राहत देने वाली मानी जा रही है। इसलिए किसानों को तैयारी करने की सलाह सब्जी वैज्ञानिकों ने दी है।
यह अनिवार्य
प्रतिकूल मौसम में जो प्रजातियां सुझाई गई है, उनकी बेहतर बढ़वार के लिए जल निकास की व्यवस्था सुदृढ़ रखनी होगी ताकि जल-जमाव जैसी स्थिति ना बन पाए। निरंतर निगरानी को भी अनिवार्य माना गया है जिससे कीट प्रकोप के लक्षण प्रारंभिक स्तर में ही पहचाने जा सकें।

प्रबंधन से राहत
असमय बारिश से हो रहे नुकसान की शत-प्रतिशत भरपाई तो संभव नहीं है लेकिन कुछ ऐसी प्रजातियां हैं, जिनकी बोनी और सही प्रबंधन से राहत मिल सकती है।
– डॉ अमित दीक्षित, डीन, उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, सांकरा, दुर्ग
