उपभोक्ता मांग कमजोर, उत्पादन लागत में वृद्धि
रायपुर। कड़ी प्रतिस्पर्धा और मांग में अनापेक्षित गिरावट के बाद पोहा जमीन पर आने लगा है। हाल ऐसा है कि निरंतर गिरावट के बाद उठाव नहीं होने की स्थिति में पोहा मिलों ने अब उत्पादन में कटौती करनी चालू कर दी है। इससे भी बड़ा संकट तब आएगा, जब रबी फसल मंडियों में आएगी और उत्साह की कमी से खरीदी प्रभावित होगी।
नवरात्रि पर्व से उम्मीद थी कि पोहा की मांग, न केवल अपने राज्य में निकलेगी बल्कि महाराष्ट्र, बिहार और अन्य उपभोक्ता राज्यों से भी आर्डर मिलेंगे लेकिन यह संभावना निर्मूल ही निकली क्योंकि चाही जाने वाली मात्रा की मांग अब तक नहीं निकल रही है। लिहाजा पर्व का उत्साह इस क्षेत्र में दिखाई नहीं दे रहा है। निश्चित ही यह उस बड़े संकट की ओर बढ़ता कदम माना जा रहा है जो आने वाली रबी फसल की कम कीमत के रूप में नजर आएगा।
उपभोक्ता मांग शून्य
छत्तीसगढ़ में उत्पादित पोहा की मांग हमेशा से महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य से रही है। इसके अलावा कर्नाटक और गुजरात भी मांग वाले राज्य रहें हैं लेकिन मांग में गिरावट इन तीनों राज्यों से भी आने की खबर है। कारण की तह में जाने पर यही जानकारी आ रही है कि प्रतिस्पर्धी मध्य प्रदेश से कड़ी टक्कर मिल रही है। इसके बावजूद गुणवत्ता चाहने वाले उपभोक्ताओं में छत्तीसगढ़ अभी भी शिखर पर बना हुआ है।
प्रोडक्शन आधा
पोहा उत्पादन की इकाइयों के लिए अपने प्रदेश में भाटापारा, रायपुर, राजनांदगांव और बिलासपुर को अलग ही पहचान मिली हुई है। इनका साथ देने के लिए प्रदेश की लगभग हर जिले में इकाइयां हैं। प्रतिस्पर्धा को दिलचस्प बनाने के प्रयासों के बाद अपना छत्तीसगढ़, अब सबसे आगे है लेकिन बढ़ती महंगाई के बीच अब कीमत अहम स्थान बनाने लगी है। ऐसे में इकाईयों के सामने अस्तित्व का संकट नजर आ रहा है। इससे बचने के लिए प्रदेश की इकाइयों ने अपनी उत्पादन क्षमता में 50 फ़ीसदी कटौती कर दी है।
असर रबी फसल पर
गुणवत्ता को पहले स्थान पर रखने वाली पोहा मिलों ने धान खरीदी का स्तर तो बनाए रखा है लेकिन क्वालिटी सही नहीं आ रही है। इधर रबी फसल चालू माह के अंत तक आने की संभावना है लेकिन पोहा में जैसी स्थितियां बनी हुई हैं, उसे देखते हुए रबी फसल की कीमत पर भी असर पड़ने की पूरी संभावना है लेकिन स्टॉक के लिए खरीदी किए जाने की प्रवृत्ति से ज्यादा मंदी के आसार तो नहीं है पर स्थितियां ऐसे ही बनी हुई हैं।ऐसे हैं भाव
ऐसे हैं भाव
उत्पादन में 50 फ़ीसदी कटौती के बाद मोटा पोहा की कीमत 2800 से 2900 रुपए क्विंटल पर बोली जा रही है तो बारीक पोहा में सौदा 3000 से 3400 रुपए क्विंटल पर हो रहा है। पोहा क्वालिटी का महामाया धान 1650 से 1700 रुपए क्विंटल पर स्थिर बना हुआ है।
मांग शून्य
नवरात्रि पर महाराष्ट्र और अन्य उपभोक्ता राज्यों की मांग में बेतरह कमी आ चुकी है। पर्व को देखते हुए उठाव की उम्मीद थी लेकिन यह फिलहाल नहीं है। ऐसे में उत्पादन में कटौती की जा रही है।
- कमलेश कुकरेजा, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ पोहा मिल एसोसिएशन, रायपुर

