भाटापारा। न्यूनतम 60 रुपए। अधिकतम 80 रुपए सैकड़ा। बीते साल की तुलना में लगभग आधी है प्रति सैकड़ा कीमत। फिर भी पूछ-परख और मांग की प्रतीक्षा कर रहा है मयूर पंख।

होलसेल पूरा। अब बारी रिटेल की लेकिन कमजोर मांग के अंदेशों के बीच जिस सतर्कता के साथ अग्रिम खरीदी की, वह सच होती नजर आ रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि बीते साल की तुलना में आधी कीमत होने के बावजूद रुझान नहीं है मयूर पंख में।

सीजन चालू लेकिन

नवरात्रि से शुरू होता है मयूर पंख का सीजन। शुरुआत बेहद धीमी रही क्योंकि प्रमुख उपभोक्ता ग्वालों की मांग ने अभी भी दस्तक नहीं दी है। मंदिरों एवं घरों के पूजा घरों में भी रखे जाते हैं मयूर पंख लेकिन यह दोनों भी खरीदी को लेकर शांत हैं। सीजन के 25 फ़ीसदी दिन गुजर चुके हैं लेकिन कमजोर मांग में सुधार की संभावना को लेकर अनिश्चित है बाजार मयूर पंख का।

शांत है ग्रामीण बाजार

ग्रामीण क्षेत्रों में भी शहरों जैसी ही स्थाई दुकानें संचालन में आ गई हैं। अनुपात में साप्ताहिक बाजार भी लगने लगे हैं, जहां मयूर पंख नजर आने लगा है लेकिन यह दोनों कारोबारी क्षेत्र भी मयूर पंख में कमजोर मांग का सामना कर रहे हैं। इसलिए भंडारित मयूर पंखों के विक्रय के लिए व्यक्तिगत संपर्क जैसे उपाय किए जाने की जानकारियां सामने आ रहीं हैं।

प्रतीक्षा कर रहा मयूर पंख

बीते बरस 100 से 120 रुपए सैकड़ा पर था मयूर पंख। इस बरस इसकी प्रति सैकड़ा कीमत में जबरदस्त गिरावटआई है। 60 से 80 रुपए सैकड़ा पर आ चुका मयूर पंख अभी भी बेहतर मांग की प्रतीक्षा कर रहा है। चल रही कीमत में और टूट की धारणा को इसलिए बल मिल रहा है क्योंकि मांग के 25 फ़ीसदी दिवस गुजर चुके हैं। ऐसी स्थितियों में अब मयूर पंख का बाजार प्रतिस्पर्धी हो चला है।