बिलासपुर। नहीं बढ़ेगी कीमत जूट और प्लास्टिक सुतली की क्योंकि दोनों में उत्पादन मांग से कहीं ज्यादा है। अलबत्ता रफू सुतली में कीमत बढ़ने का अंदेशा इसलिए है क्योंकि इसमें उत्पादन लागत साल- दर- साल बढ़ रही है।
जूट सुतली की मांग के लिए फिलहाल दो माह का वक्त है लेकिन इकाइयां तैयार हो रहीं हैं जूट में नई फसल की खरीदी के लिए। इसी तरह प्लास्टिक सुतली बनाने वाली इकाइयों ने भी खरीफ सत्र के लिए प्लास्टिक दाने में खरीदी चालू कर दी है। इसमें भी कीमत स्थिर रहने की धारणा इसलिए है क्योंकि प्लास्टिक की सुतली बनाने वाली कई इकाइयां छत्तीसगढ़ में ही संचालन में आ गई हैं।
जूट उत्पादन अपेक्षानुरूप
पश्चिम बंगाल में इस बार जूट की फसल आशा के अनुरूप रही। इसलिए जूट सुतली में प्रति किलो कीमत 200 से 225 रुपए किलो पर स्थिर है। यह स्थिरता इसलिए भी बने रहने की धारणा है क्योंकि प्लास्टिक सुतली मजबूत प्रतिस्पर्धी के रूप में सामने है। अलबत्ता रफू के काम आने वाली जूट सुतली 220 से 230 रुपए किलो पर है, जो जरूर महंगी हो सकती है क्योंकि पुराने बारदानों का उपयोग और बाजार लगातार बढ़ रहा है।

दो ग्रेड, दोनों शांत
प्लास्टिक के दाने का आयात लगातार तीसरे साल भी बंद है। इसलिए प्लास्टिक वेस्ट से प्लास्टिक की सुतली बनाई जा रही है। जिसकी कीमत 70 से 180 रुपए किलो बोली जा रही है। सेकंड ग्रेड की यह सुतली स्थिर है लेकिन उपलब्ध आयातित प्लास्टिक के दाने महंगे हैं। इसलिए कीमत प्रति किलो 180 से 200 रुपए बोली जा रही है। चल रही कीमत में वृद्धि की धारणा इसलिए भी नहीं है क्योंकि छत्तीसगढ़ में ही प्लास्टिक सुतली का उत्पादन करने वाली कई इकाइयां संचालन में आ गईं हैं।
तैयारी सीजन के लिए
जूट और प्लास्टिक की सुतली वैसे तो पूरे साल मांग में रहती है। सीजन की शुरुआत होती है अक्टूबर अंत से, जो खत्म होती है मई और जून माह में। 8 से 9 माह की अवधि में खूब मांग में रहतीं हैं यह दोनों सुतलियां। इसलिए भरपूर मांग की संभावना को देखते हुए इकाइयों की खरीदी कच्चे माल में निकली हुई है।