चीन की खरीदी से भाव 29 सौ रुपये क्विंटल
ग्वार गम की तर्ज पर अब “चरौटा गम”
बिलासपुर। हर्बल चाय और कॉफी ही नहीं, अब चरौटा से ‘कासिया टोरा गम’ बनने लगा है। इस नए खुलासे के बाद चरौटा ने पहली बार 2900 रुपए क्विंटल का नया भाव, अपने नाम दर्ज कर लिया है। मांग इतनी ज्यादा है कि दो साल पुराना स्टॉक अब खत्म होने की ओर है। ऐसी स्थितियों के बीच तेजी की धारणा लगातार बनी हुई है।
90 के दशक में हुए अनुसंधान में इसमें कुछ ऐसे औषधिय तत्वों की मौजूदगी का खुलासा हुआ था,जिसकी मदद से हर्बल-टी और हर्बल कॉफी बनाई जा सकती थी। पहले खरीददार देश, जापान की खरीदी ने भारतीय चरौटा को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दी। आज चीन, ताईवान और मलेशिया जैसे तीन और देश इसकी खरीदी कर रहें हैं क्योंकि इससे ‘कासिया टोरा गम’ भी बनाया जा रहा है। ऐसे में तेजी का नया दौर चल पड़ा है।
पहली बार चरौटा गम
नई तकनीक के इजाद के क्षेत्र में आज चीन शिखर पर है। जो भारतीय चरौटा निर्यात के रास्ते चीन पहुंच रहा है, उससे एक खास किस्म का गम बनाया जा रहा है। जिसका उपयोग, समुद्री खनन क्षेत्र में काम कर रही, रिग मशीन की निर्बाध गति को बनाए रखने में सहायक, “गम” उत्पादन में किया जा रहा है। यह नई तकनीक गुजरात में भी आ चुकी है। इसका उपयोग समुद्री क्षेत्र में किया जा रहा है।
फसल भी कमजोर
पुष्पन के बाद परिपक्वता अवधि के दौरान हुई बारिश ने नई फसल को बहुत नुकसान पहुंचाया, तो संक्रमण के दौर के बाद निर्यात के रास्ते खोले जाने से मांग दोगुनी हुई।लिहाजा तेजी का ऐसा दौर चल रहा है कि यह न्यूनतम 2200 रुपये और अधिकतम 2900 रुपये क्विंटल पर पहुंच चुका है।निर्यात और घरेलू मांग इतनी ज्यादा है कि नई फसल का स्टॉक पूरी तरह खत्म हो चुका है।
मांग में छत्तीसगढ़
निर्यातक देशों की मांग में, अभी भी छत्तीसगढ़ का चरौटा, शिखर पर मजबूती से बना हुआ है।प्रतिस्पर्धी राज्य झारखंड, बिहार के बीच प्राथमिकता, अपने ही प्रदेश को मिल रही है। ऐसे में मांग को पूरा कर पाना असंभव ही लग रहा है। इस बीच महामारी के पहले दौर में रखा स्टॉक क्लियर करने के प्रयास हैं। गुणवत्ता के आधार पर पड़ोसी राज्यों से भी संपर्क किया जा रहा है।
सरकार भी खरीदी रही
इधर छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ ने भी समर्थन मूल्य पर चरौटा की खरीदी चालू कर दी है। इसमें 2 ग्रेड बनाए जाने के बाद, ग्रेड 1 का चरोटा बीज 16 रुपए और ग्रेड 2 का चरोटा बीज 14 रुपये 50 पैसे प्रति किलो की दर पर खरीदा जा रहा है। मालूम हो कि प्रदेश में सरगुजा और बस्तर के वनांचल क्षेत्र में इसका संग्रहण अच्छी-खासी मात्रा में हो रहा है। लिहाजा भाव में तेजी आगे भी बने रहने की पूरी संभावना है।
ग्वार गम की तर्ज पर, चरौटा गम बनाए जाने में सफलता के बाद निर्यातक देशों की मांग में तेजी की है।
-सुभाष अग्रवाल, संचालक,एस पी ट्रेडर्स,रायपुर



