भाटापारा। थी 50 रुपए किलो। है 65 रुपए किलो। एकमुश्त 15 रुपए की बढ़ोतरी के बाद ‘मिंझरा दाल’ आगे भी वृद्धि का संकेत दे रही है क्योंकि दलहन की सभी प्रजातियां मंहगी होने लगीं हैं।
चावल के बाद अब दलहन में भी गर्मी आने लगी है। उपभोक्ता मांग तो सामान्य है लेकिन दीप पर्व की संभावित मांग को देखते हुए स्टाॅकिस्ट, ट्रेडर्स और दलहन मिलें अग्रिम खरीदी कर रहीं हैं। इसलिए दलहन की सभी किस्मों में तेजी का दौर लंबी अवधि तक बने रहने की धारणा है।

मजबूत अरहर और उड़द
दीप पर्व को देखते हुए उत्पादक क्षेत्रों से दलहन की आवक कृषि उपज मंडी में होने लगी है। दीप पर्व के लिए हो रही प्रतिस्पर्धी खरीदी के बीच अरहर 8000 से 8500 रुपए क्विंटल और उड़द 8500 से 8800 रुपए क्विंटल पर मजबूत हो चला है। मूंग में प्रति क्विंटल भाव 6500 से 7000 रुपए पर पहुंचे हुए हैं। 6500 से 7000 रुपए पर हो रहे सौदे के बाद चना और तेज होने का संकेत दे रहा है जबकि बटरी 4000 रुपए और 3500 से 3600 रुपए क्विंटल पर पहुंचने के बाद तिवरा, बोनी की मांग की प्रतीक्षा में है।
मिंझरा दाल में उबाल
थी 50 रुपए किलो। है 65 रुपए किलो। मिंझरा दाल में चल रही यह कीमत और बढ़ सकती है क्योंकि दलहन की सभी किस्में महंगी हो चलीं हैं। पूरे साल मांग में रहने वाली अरहर दाल में नई कीमत 145 से 150 रुपए किलो बोली जा रही है। मांग के दिन हैं उड़द की दाल में इसलिए छिलके वाली उड़द दाल 120 रुपए और धुली हुई उड़द दाल 140 से 150 रुपए किलो पर मजबूत है जबकि छिलका और धुली हुई मूंग दाल 120 रुपए पर स्थिर है। हल्की मांग में है तिवरा दाल फिर भी 50 से 55 रुपए किलो जैसी क्रयशक्ति के भीतर वाली कीमत बोली जा रही है।

प्रतिस्पर्धी खरीदी
संभावित बेहतर मांग को देखते हुए दलहन उत्पादक इकाइयों के साथ स्टॉकिस्ट और ट्रेडर्स की खरीदी प्रतिस्पर्धी माहौल में निकली हुई है। साथ-साथ दलहन उपभोक्ता राज्य कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, महाराष्ट्र और झारखंड के दलहन बाजार से संपर्क बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा नए उपभोक्ता क्षेत्र की भी तलाश की जा रही है।