है सीजन फिर भी शांत दलहन

बिलासपुर। बेहद शांत है दलहन। यह तब, जब दलहन में मांग के दिन एकदम करीब आ चुके हैं। लेकिन एकमात्र चना की दाल ही है, जिसका सहारा दलहन बाजार को मिल रहा है।

सामान्य जा रहा है दलहन का बाजार। पितृ पक्ष जिसमें सीजन याने दलहन की मांग वाले दिन आ चुकें हैं लेकिन दीप पर्व तक चलने वाला यह सीजन जैसा संकेत दे रहा है, उससे इस कारोबार के हाथ पैर फूले हुए हैं क्योंकि टूटी हुई कीमत के बावजूद उपभोक्ता मांग नहीं निकल रही है।दिन उड़द और मूंग के लेकिन…

दिन उड़द और मूंग के लेकिन…

पितृ पक्ष है। पूरे पखवाड़े उड़द और मूंग दाल की मांग रहती है लेकिन उपभोक्ता मांग सिरे से गायब है। यह तब, जब उड़द दाल छिलका वाली 90 से 98 रुपए किलो और धुली उड़द की दाल 112 रुपए किलो पर स्थिर है। मूंग दाल छिलका वाली में भाव 98 रुपए किलो और धुली मूंग दाल 100 से 110 रुपए किलो पर शांत है। दोनों किस्म की दलहन में मांग का कमजोर रहना दलहन बाजार को हताश कर रहा है।

खंडा अभी भी आगे

किलो पीछे 20 रुपए की टूट के बाद अरहर दाल 145 155 रुपए किलो पर आ गई है लेकिन खंडा 85 से 110 रुपए किलो जैसी कीमत के साथ अभी भी मांग की पहली सीढ़ी पर मजबूती से जमा हुआ है। लगभग 70 फ़ीसदी हिस्सेदारी पर कब्जा जमा चुके अरहर की खंडा दाल, साबुत अरहर की दाल के लिए कड़ी चुनौती बन चुकी है। बेहतर मांग की संभावना दूर-दूर तक बनती नजर नहीं आ रही है।
सहारा सिर्फ चना दाल का

सहारा सिर्फ चना दाल का

दलहन में चना दाल ही हताश दलहन को सहारा दिए हुए हैं क्योंकि मांग में निरंतरता बनी हुई है। कीमत भी क्रय शक्ति के भीतर ही मानी जा रही है। फिलहाल इसमें 95 रुपए किलो की दर पर बिकवाली की खबर है। राहत मसूर की दाल भी दे रही है जिसमें पैक्ड प्रोडक्ट बनाने वाली ईकाइयों की मांग है। फिलहाल यह 76 रुपये किलो की दर पर शांत है लेकिन खुदरा मांग इसमें भी बेहद कमजोर है।