मंदी की धारणा प्रबल
बिलासपुर। कामकाज बेहद ढीला। उतार की राह पर है तिवरा और बटरी की दाल। दोनों किस्म के दलहन में बेहतर मांग की संभावना दीप पर्व पर ही निकलने की व्यक्त की जा रही है।
महंगी अरहर दाल और खंडा का विकल्प बन चुकी बटरी दाल अब मंदी की राह पर है। कमोबेश तिवरा दाल में भी हाल ऐसा ही बन रहा है। त्यौहारी सीजन की आहट के बीच तेजी की धारणा उस समय ध्वस्त होती नजर आई, जब दोनों किस्म के दलहन में क्विंटल पीछे 200 रुपए की मंदी आई।

उपभोक्ता मांग कमजोर
छत्तीसगढ़ में उत्पादित बटरी दाल का सबसे बड़ा उपभोक्ता राज्य है उत्तर प्रदेश। इसने फिलहाल मांग की मात्रा घटानी शुरू कर दी है। जबकि तिवरा दाल में राज्य के भीतर ही मांग रहती आई है। यहां से भी उत्साहजनक मांग नहीं निकल रही है। ऐसे में भाव में टूट आने लगी है। फिलहाल तिवरा दाल 6500 रुपए क्विंटल पर आ चुका है, तो बटरी दाल में सौदे 8000 रुपए क्विंटल पर होने की खबर है।

मंडियों में ऐसा है हाल
प्रदेश की कृषि उपज मंडियों में से प्रमुख भाटापारा कृषि उपज मंडी में तिवरा और बटरी की आवक सामान्य बताई जा रही है लेकिन दलहन बनाने वाली इकाइयों की खरीदी बेहद कमजोर है क्योंकि तैयार उत्पादन को उपभोक्ताओं का प्रतिसाद नहीं मिल रहा है। ऐसे में प्रांगण में आ रहा तिवरा 4400 से 4800 रुपए क्विंटल में नीलाम हो रहा है, तो बटरी 5500 से 5900 रुपये क्विंटल पर सुस्त है।

दीप पर्व से आस
दलहन उत्पादन करने वाली यूनिटों को अब उम्मीद आगत दीप पर्व से ही है। इस दौरान निकलने वाली मांग भंडारित उत्पादन के लिए राह खोलेगी, तो नई मांग के लिए मंडियों से खरीदी को भी प्रोत्साहित करेगी। याने अच्छे दिन, दो माह बाद ही आने की संभावना है। इस बीच छिटपुट मांग की आस पितृपक्ष से ही है इकाइयों को।
