उत्पादन में 40 प्रतिशत गिरावट की आशंका

सतीश अग्रवाल

बिलासपुर। होता था, एक आम का वजन 300 से 350 ग्राम। अब आ रहा है 200 ग्राम। आम उत्पादक क्षेत्र कोंकण में यह नया बदलाव जलवायु परिवर्तन के बाद उस बढ़ते तापमान के रूप में आ रहा है, जो 38 डिग्री सेल्सियस के रूप में पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में कमजोर उत्पादन के रूप में सामने आ सकता है।

कटाई के पहले ही नुकसान की गिनती कर रहे हैं कोंकण के आम उत्पादक किसान। फरवरी में ही बढ़ते तापमान से गेहूं के बाद, फल उत्पादक किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें दिखाई देने लगी हैं क्योंकि बागान में तेज धूप नहीं सह पा रहे हैं आम। समय से पहले ही यह गिरने लगे हैं। आम की हापुस प्रजाति पर यह संकट पहली बार देख रहे हैं किसान।

बड़ा बदलाव पहली बार

कोंकण में चालू सप्ताह में पारा 38 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच चुका है। असर पहली बार सिंधुदुर्ग, रायगढ़ और रत्नागिरी के उस क्षेत्र पर देखा जा रहा है, जहां आम की व्यवसायिक खेती होती है। सामान्य याने अनुकूल मौसम में प्रति आम का वजन 300 से 350 ग्राम होता था। तेज धूप से गिर रहे आम का वजन लिए जाने पर यह 200 से 250 ग्राम निकल रहा है।

बढ़ रहा संकट

आम उत्पादक क्षेत्रों से आ रही खबरों के मुताबिक तापमान में यह बढ़त फरवरी के शुरुआती दिनों से ही देखी जा रही है। तेज धूप के प्रति आम की सहनशीलता तेजी से घटते क्रम पर है और युवा फल तना का साथ छोड़ रहे हैं। तापमान का यह कदम आने वाले सप्ताह में भी बढ़ता रहा, तो संकट बेहद कमजोर उत्पादन के रूप में सामने आ सकता है। रोक के कोई उपाय नहीं है।

40 प्रतिशत नुकसान की आशंका

खबरों के मुताबिक आम की खेती करने वाले किसान अब फसल कटाई के पहले नुकसान की गिनती कर रहे हैं क्योंकि आम का कम होता वजन, हानि का साफ संकेत दे रहा है। बढ़ते तापमान के बीच इस बरस कोंकण के आम की फसल में 40 फ़ीसदी की कमी की आशंका जताई जा रही है।

आईएमडी का अलर्ट

भारतीय मौसम विभाग ने 21 फरवरी को आम किसानों को अलर्ट कर दिया था कि तापमान बढ़ रहा है। फसल बचाव के लिए उसने सुझाव दिया था कि प्रति पेड़ पर नियमित रूप से 100 लीटर पानी दें। तने के आसपास के क्षेत्र को घास से ढकें। यह विधि तापमान से झटका खा रहे पेड़ों को बचाने में मदद करेगी और युवा फल नहीं गिरेंगे।

उत्पादन पर पड़ेगा असर

आम के अच्छे उत्पादन के लिए 27 डिग्री सेल्सियस के तापमान को बेहतर माना गया है । इस साल फरवरी माह में ही प्रदेश का उच्च तापमान 36 डिग्री सेल्सियस के आसपास रिकॉर्ड किया गया है । मौसम के अचानक परिवर्तित होने, तापमान के बढ़ने की वजह से आम के फूल और फल को नुकसान हो रहा है जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा।
अजीत विलियम्स, साइंटिस्ट (फॉरेस्ट्री), बीटीसी कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर एंड रिसर्च स्टेशन बिलासपुर